इतनी मुद्दत बाद मिले हो !
किन सोचों में गुम फिरते हो ?
इतने खैफ क्यूँ रहते हो ?
हर आहट से डर जाते हो
तेज़ हवा ने मुझसे पुछा
रेत पे क्या लिखते रहते हो ?
काश कोई हमसे भी पूछे
रात गये तक क्यों जागे हो ?
मैं दरिया से भी डरता हूँ
तुम दरिया से भी गहरे हो !
कौन सी बात है तुम में ऐसी
इतने अच्छे क्यों लगते हो ?
पीछे मुड कर क्यों देखा था
पत्थर बन कर क्या तकते हो
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