ये सनाटा बोहत महंगा पड़ेगा
उससे भी फूट कर रोना पड़ेगा
वही दो चार चेहरे अजनबी से
उन्ही को फिर से दोहराना पड़ेगा
कोई घर से निकलता ही नहीं है
हवा को थक के सोया जाना पड़ेगा
यहाँ सूरज भी काला पड़ गाया है
कहीं से दिन भी मंगवाना पड़ेगा
वो अच्छे थे जो पहले मर गये हैं
हमें कुछ और पछताना पड़ेगा
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


No comments:
Post a Comment