जाते जाते तो अगर आँख भर आती नही
मुझे भी शायद कभी तेरी याद आती नहीं
पता नहीं कुछ उन में है या उनंके दिल में चोर है
उनंके चेहरे पर मेरी नज़र टिक पाती नहीं
समझ ही आता नहीं ये रोग क्या है इश्क का
नींद आती तो है लेकिन नींद ही आती नहीं
तू अगर मिल के मुझसे दूर करती सब गिले
मैं भी पछताता नहीं तू भी पछताती नहीं
जब से खो दिया तुझको खो दिया है हर यकीन
इन् लबों पे आजकल कोई दुआ आती नहीं
तू बता मैं कैसे समझों तेरे दिल की बात को
अपनी ख्वहिश तू जुबां पर जब तलक लाती नहीं
एक हम हैं जो उन्हें भूल ही पाते नहीं
एक वो हैं जिन्हें हमारी याद तक आती नहीं
इश्क की दास्ताँ अजीब दास्ताँ है जो
समझ तो आती है लेकिन समझाई जाती नहीं
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