तुझसे बिछडा है तो फिर शाद कहाँ रहता है
दिल बहारों में बा_अंदाज़-ए-खज़ां रहता है
पहले खुशबू तेरी आती है मेरी साँसों से
देर तक फिर तेरे होने का गुमान रहता है
रंग क्या क्या मेरे चेहरे पे अयान होते हैं
जाने की अकुच मेरे सीने में निहाँ रहता है
दिल में अब भी हैं तेरी याद के धुंधले साए
आग बुझ जाए तो कुछ देर धुँआ रहता है
एक आवाज़ तो आई थी मेरे हक में 'इश्क'
कौन था क्या था मुझे याद कहाँ रहता है
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