हमसफ़र ग़म जो मुहब्बत में दिया है तुमने
यह भी मुझ पर बड़ा एहसान किया है तुमने
एक मुद्दत से इसी दिन की थी हसरत दिल में
आज मैं खुश हूँ की दीवाना कहा है तुमने
जब भी टकराई मेरे जिस्म से यह शोख हवा
मुझको महसूस हुआ के छुया है तुमने
क्या मेरे दिल की धडकनों की ही आवाज़ है यह
ये के फिर कान में कुछ आ के कहा है तुमने
हिचकियाँ भी कभी कम्बखत नहीं आती है
जो ये सोचूं के मुझे याद किया है तुमने
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