यादों को अपने दिल से मिटा क्यूँ नहीं देते
जो जा चुका है उसको भुला क्यूँ नहीं देते
मुज्ज्रिम हूँ मैं तेरा मुझे इतना तो बता
खामोश खड़े हो क्यूँ, सज़ा क्यूँ नही देते
उससे जिस के सारे ज़ख्म, हैं इनायत तेरी
गर है तुम्हारे पास तो, दवा क्यूँ नहीं देते
कई घर नहीं बसते हैं, जिनकी वजह से
उन् अधजली रस्मों को जला क्यूँ नहीं देते
उसने तुम्हारी खातिर क्या क्या नहीं किया
तुम उस की वफाओं का सिला, क्यूँ नहीं देते
तुम्हें मुझसे मोहब्बत है जानता हूँ मैं
ये बात अपने लब से बता, क्यूँ नहीं देते
अनमोल खजाना हैं, मुस्कुराहटें तेरी
थोड़ा सा इन्हें मुझपे, लुटा क्यूँ नहीं देते
वो आग जो दिल में लगायी थी कभी तुमने
वो आग आज ख़ुद ही, बुझा क्यूँ नहीं देते
एक अरसा हुआ चैन से सोये हुए 'मेरी जान'
मेरा चैन, मेरी नींद लूट क्यूँ नहीं लेते
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