अश्क आँखों में मेरे देख के रोते क्यूँ हो,
दिल भर आता है तो फिर दिल को दुखाते क्यूँ हो,
इन से वाबस्ता है जब मेरा मुक़द्दर फिर तुम,
मेरे शानो से यह जुल्फ हटाते क्यूँ हो.
मिलने आते हो तो फिर लौट के जाते क्यूँ हो,
अपने हाथों से यूं चेहरे को छुपाते क्यूँ हो,
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