दर्द जब तेरी आता है तो गिला किस से करे
हिज्र जब तुने दिया है तो मिला किस से करे
अक्स बिखरा है तेरा टूटके आईने के साथ
हो गई ज़ख्मी नज़र अक्स चुना किस से करे
मैं सफर में हूँ मेरे साथ जुदाई तेरी
हमसफ़र गम है तो जुदा किस को किस से करे
खिल उठे गुल या खुले दस्ते तेरे
हर तरफ़ तू है तो फिर तेरा पता किस से करे
तेरे लब, तेरी निगाह, तेरा आरिज़ तेरी जुल्फ
इस में जिंदा है तो इस दिल को रिहा किस से करे
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


No comments:
Post a Comment