जालिम था वोह और जुलम की आदत भी बोहत थी,
मजबूर थे हम उससे मोहब्बत भी बोहत थी,
वाकिफ ही न था रस्म-ए-मोहब्बत से वोह वरना,
दिल के लिए थोडी सी इनायत भी बोहत थी,
यूँ ही नहीं मशहूर-ए-ज़माना कातिल मेरा,
उस शख्स को इस फेन में महारत भी बोहत थी...
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