ज़माना याद तेरा ऐ ! दिल-ए-नाकाम आता है
टपक पड़ते हैं आंसू जब वफ़ा का नाम आता है
वफ़ा तुमसे करेंगे दुःख सहेंगे नाज़ उठाएंगे
जिसे आता है दिल देना उससे हर काम आता है
अकेले करवटे हैं रात भर बिस्तर पे और हम हैं
कहाँ पहलू को खाली देख कर आराम आता है
हसीनो में बसर कर दिल जवानी "आरजू" हमने
लगाना दिल का सीखे हैं यही इक काम आता है
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