कैसे कह दूँ की मुलाकात नहीं होती है
रोज़ मिलते हैं, मगर बात नहीं होती है
आप लिलाह न देखा करें आईना कभी
दिल का आ जाना, बड़ी बात नहीं होती है
हाल-ए-दिल पूछने वाले, तेरी दुनिया में कभी
दिन तो होता है, मगर रात नहीं होती है
जब भी मिलते हैं तो, कह्ते हैं की कैसे हो 'शकील'
इस से आगे तो, कोई बात नहीं होती है
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