Saturday, June 6, 2009

serwat shah jaana ki shayyiri

जिन रास्तों से तुम आए हमारे दिल तक
उन रास्तों से किसी को गुजरने नहीं दिया
बैठी हूँ आज भी मैं वक्त थाम कर
मैंने उससे भी फ़ैसला करने नहीं दिया
इन् हाथों की लकीरों को इस तरह से रखा
हमने तुम्हारे नाम को मिटने नहीं दिया
कागज़ पर अपने दिल के लिखा तेरा नाम और
कलम तोड़ दिया और कुछ नया लिखने नही दिया
बारिश है, एक लड़की है और खुली सड़क
लेकिन तेरे ख्याल ने बिखेरने नहीं दिया
कोई तो है जिस की हर दुआ में मैं हूँ
इस एक गुमां ने मुझे मरने नहीं दिया

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