सितमगरों की तरफदार हो गई शायद
जिंदगी तू भी रीयाकार हो गई शायद
तेरे जाने का सबब और कुछ नही लेकिन
तो कहीं मुझसे ही बेजार हो गई शायद
आज चुप-चुप है बोहत बोलने वाला कैसे
आज ख़ुद से कोई तकरार हो गई शायद
उफक पे दूर कोई डूब रहा है जल कर
तीरगी दिल के आर पार हो गई शायद
सह रहा हूँ मैं कबसे हिज्र का खंजर जानां
आज की शब् भी इंतज़ार हो गई शायद
'खान' रुखसार जो भेजे हैं कुछ हुआ है सही
दिल की हसरत तेरा दीदार हो गई शायद
Saturday, June 6, 2009
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