आज तो बे_सबब उदास है जी
इश्क होता तो कोई बात भी थी
जलता फिरता हूँ क्यूँ दो_पहरों में
जाने क्या चीज़ खो गई मेरी
वहीं फिरता हूँ मैं भी खाक़ बसर
इस भरे शहर में है एक गली
छुपता फिरता है इश्क दुनिया से
फेलाती जा रही है रुसवाई
हम_नशीं क्या कहूँ के वो क्या है
छोड़ ये बात नींद उड़ने लगी
आज तो वो भी कुछ खामोश सा था
मैंने भी उसे कोई बात न की
एक दम उसके हाथ चूम लिए
ये मुझे बैठे बैठे क्या सूझी
तू जो इतना उदास है 'नासिर'
तुझे क्या हो गया बता तो सही
Monday, June 1, 2009
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