मुहब्बतों से अपनी मुझे मात दे गया
वो जाते जाते ऐसे इलज़ामात दे गया
आईने मैं खुदको को कभी देख न पायी
मेरे ख़िलाफ़ मुझको ही जज़्बात दे गया
मुड के जवाब देने से पत्थर की बनूँगी
दुनिया को पूछने को वो सवालात दे गया
नफरत कहूं इनको या उल्फत कहूँ इन्हें
हर पल बदलते ऐसे खियालात दे गया
आँखों से मेरी प्यार था उसको इस कदर
सो आंसू मेरी आँखों को सोगात दे गया
बन के सवेरा छाई जीवन में जिस के तू
काटने को लम्बी सियाह रात दे गया
सिसकी बन के जो तेरे दिल में रह गई
दम तोड़ती लबों को ऐसी बात दे गया
'साबी' तू बन पुजारन जिसे पुजती रही
पूजने को अपनी तुझे जात दे गया
Saturday, June 6, 2009
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