Monday, June 8, 2009

gulab ki shayyiri

दर्द-ए-दिल थाम के सहते है, हम तो चुप ही है ?
लोग कया कया नहीं कह्ते है, हम तो चुप ही है ?
आप क्यूँ दिल के तड़पने का बुरा मान गए !
आप से कुछ नहीं कह्ते हैं, हम तो चुप ही है ?
हम खतावार नहीं है, दिल के बहक जाने का !
ये कागार आप ही ढाते हैं, हम तो चुप ही है ?

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