इस तरह सताया है परेशान किया है
गोया की मुहबत नहीं एहसान किया है
सोचा था की तुम दुसरो जैसे नहीं होगे
तुमने भी वही काम मेरी जान किया है
मुशकिल था बहुत मेरे लिए तर्क-ए-तालुक
ये काम भी तुमने मेरा आसान किया है
हर रोज़ सजाते है तेरी हिज्र में गुंचे
आंखों को तेरी याद में गुलदान किया है
Friday, June 5, 2009
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