अपनी बीती हुई रंगीन जवानी देगा
मुझको तस्वीर भी देगा तोह पुरानी देगा
आदतें मिलती हैं सूरज से बोहत कुछ उसकी
वक्त-ऐ-रुखसत भी वो इक शाम सुहानी देगा
मेरे माथे की लकीरों में इजाफा कर के
वो भी माजी की तरह अपनी निशानी देगा
बर्फ हो जाएगा जब मेरे लहू का दरिया
तब कहीं जा के वो मौजों को रवानी देगा
मैंने ये सोच के बोए नही ख्वाबों के दरख्त
कौन जंगल में लगे पेड को पानी देगा .. !!!
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