पा-बा-गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन
दस्त-बसता शहर में खोले मेरी ज़ंजीर कौन
मेरा सर हाज़िर है लेकिन मेरा मुंसिफ देख ले
कर रहा है मेरे फर्द-ऐ-जुर्म को तहरीर कौन
मेरी चादर तोह छिनी थी शाम की तन्हाई ने
बे-रिदै को मेरी फिर दे गया ताशहीर कौन
नींद जब ख्वाबों से प्यारी हो तोह ऐसे अहद में
ख्वाब देखे कौन और ख्वाबों को दे ताबीर कौन
रेत अभी पिछले मकानों की न वापस आई थी
फिर लब-ऐ-साहिल घरौंदा कर गया तामीर कौन
सारे रिश्ते हिज्रतों में साथ देते हैं तोह फिर
शहर से जाते हुए होता है दामन-गीर कौन
दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आजाद हैं
देखना है खेंचता है मुझपे पहला तीर कौन
Friday, May 29, 2009
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