दर्द-ए-दील में कमी न हो जाये
दोस्ती दुश्मनी न हो जाये
तुम मेरी दोस्ती का दम न भरो
आसमान मुदई न हो जाये
बैठता हूँ हमेशा रिन्दों में
कहीं जाहिद वाली न हो जाये
अपने खू-ए-वफ़ा से डरता हूँ
आशकी बंदगी ना हो जाये
Sunday, May 10, 2009
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