मैं कब कहता हूँ वो अच्छा बहुत है
मगर उस्सने मुझे चाह बहुत है
खुदा इस शहर को महफूज़ रखे
ये बच्चों की तरह हँसता बहुत है
मैं हर लम्हे में सदियाँ देखता हूँ
तुम्हारे साथ एक लम्हा बहुत है
मेरा दिल बारिशों में फूल जैसा
ये बच्चा रात में रोता बहुत है
वो अब लाखों दिलों से खेलता है
मुझे पहचान ले, इतना बहुत है
Friday, May 29, 2009
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