कितनी मुश्किल से कटी कल की मेरी रात ना पुछ
दिल से निकली हुई होंठो में दबी बात ना पूछ
वो किस अदा से मेरे सामने से गुज़रा अभी
किस तरह मैंने संभाले मेरे जज़्बात ना पूछ
वक़त जो बदले तो इंसान बदल जाते है
कया कया नहीं दिखलाते ये गर्दिशे हालत ना पूछ
वो किसी का हो भी गया और मुझे खबर ना हुई
किस तरह उसने छुडाया है मुझसे हाथ ना पूछ
इस तरह पल में मुझे बेगाना कर दिया उसने
किस तरह अपनों से खायी है मैंने मात ना पूछ
अब तेरा प्यार नहीं है तो सनम कुछ भी नहीं
कितनी मुश्किल से बनी थी दिल की कायनात ना पूछ !
Tuesday, March 17, 2009
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