मुहब्बत में वो नफरत के दीये भी साथ रखता है
वो मुझसे प्यार करता है पर गिले भी साथ रखता है
बा_ज़ाहिर वो भरे शहरों में तन्हा मुसाफिर है
वो अपनी जात में कुछ काफले भी साथ रखता है
वो मुझको सोचता है और ताल्लुक भी नही रखता
करीब आता है लेकिन फासले भी साथ रखता है
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


No comments:
Post a Comment