शाम होते ही खुद को परवाना बना देता हूँ,
हूँ वो मैकश कि घर को मैखाना बना देता हूँ.
होश में रहता हूँ तो अपनों से भी लड़ बैठूं,
पीकर तो रकीबों का याराना बना देता हूँ,
जाहिल हुआ हूँ बेकस लेकिन एक फन तो है,
मैं जिस से मिलता हूँ, दीवाना बना देता हूँ..........
Wednesday, April 15, 2009
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